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निशी वर्चस्व की गोद में बैठ हुई थी , उसके दोनों हाथ वर्चस्व के चेस्ट पर रखे हुए थे , और उसके चेहरे पर हैरानी भरे भाव थे , वो वर्चस्व की गोद से उठने की कोशिश करते हुए , अटकती हुई आवाज में बोली -

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निशी वर्चस्व की गोद में बैठ हुई थी , उसके दोनों हाथ वर्चस्व के चेस्ट पर रखे हुए थे , और उसके चेहरे पर हैरानी भरे भाव थे , वो वर्चस्व की गोद से उठने की कोशिश करते हुए , अटकती हुई आवाज में बोली -
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